क्या आप जानते हैं कि भारत में नववर्ष की शुरुआत मार्च-अप्रैल में भी होती है? जी हाँ, हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास से नए वर्ष की शुरुआत होती है, और इसी अवसर पर मनाया जाने वाला त्योहार है गुड़ी पड़वा।
2025 में यह पारंपरिक नववर्ष का स्वागत 29-30 मार्च को किया जाएगा। यह त्योहार न केवल नए साल की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि इसमें छिपी है भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत और आध्यात्मिक महत्व की गहरी परतें।
गुड़ी पड़वा 2025 – पारंपरिक नववर्ष का स्वागत
गुड़ी पड़वा का परिचय और महत्व
गुड़ी पड़वा क्यों मनाते हैं हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार नए संवत्सर की शुरुआत का प्रतीक है।
गुड़ी पड़वा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
29 या 30 मार्च को मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को शाम 4:27 बजे से प्रारंभ होकर 30 मार्च को दोपहर 12:49 बजे तक रहेगी। इस अवधि में की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
पौराणिक महत्व और मान्यताएं
गुड़ी पड़वा का महत्व और मान्यता है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। साथ ही, यह दिन श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने से भी जुड़ा है। इस दिन लोग भगवान ब्रह्मा और विष्णु की विशेष पूजा करते हैं।
पारंपरिक रीति-रिवाज
गुड़ी पड़वा के दिन घर के मुख्य द्वार पर गुड़ी (विजय पताका) फहराई जाती है। पूजन विधि और मंत्र के साथ रंगोली बनाने और आम के पत्तों से तोरण लगाने की परंपरा है। महिलाएं नौवारी साड़ी और पुरुष कुर्ता-पायजामा या धोती पहनते हैं।
पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद गणेश और लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है। सुंदरकांड, रामरक्षा स्त्रोत और देवी भगवती के मंत्रों का जाप किया जाता है।
विशेष व्यंजन
इस अवसर पर पूरन पोली, श्रीखंड और खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। आंध्र प्रदेश में पच्चड़ी बनाने की विशेष परंपरा है।
क्षेत्रीय विविधताएं
महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक में युगादि और गोवा व केरल में कोंकणी समुदाय इसे संवत्सर पड़वो के नाम से जानता है। हर क्षेत्र में इसे अपनी विशिष्ट परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
सामाजिक महत्व
गुड़ी पड़वा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि समृद्धि और सफलता का प्रतीक भी है। यह महिलाओं के बीच एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।
2025 के लिए विशेष तैयारियां
त्योहार से पहले घर की साफ-सफाई, रंगोली और तोरण की तैयारी, नए कपड़ों की खरीदारी और पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी की जाती है। समुदाय में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
समापन
गुड़ी पड़वा 2025 का त्योहार भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता का जीवंत उदाहरण है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि कैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक ही त्योहार अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, फिर भी इसका मूल संदेश एक ही रहता है – नई शुरुआत और आशा का संदेश।
आइए, इस गुड़ी पड़वा पर हम सभी मिलकर न केवल नए साल का स्वागत करें, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी संजोएं और आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाने का संकल्प लें।
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